बिहार कैबिनेट की पहली बैठक में बड़े फैसले: राज्य बनेगा नया टेक हब, चीनी मिलों के पुनर्जीवन पर भी मंजूरी
नई सरकार की पहली बिहार कैबिनेट बैठक में छह महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी मिली। राज्य को टेक हब बनाने, चीनी मिलों के पुनर्जीवन और रोजगार बढ़ाने के लिए बड़ी योजनाओं पर सहमति बनी।
नई सरकार के गठन के बाद बिहार मंत्रिमंडल की पहली बैठक मंगलवार को आयोजित की गई, जिसमें छह अहम एजेंडों को मंजूरी दी गई। बैठक के बाद मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सभी प्रमुख निर्णयों की जानकारी साझा की। इस बैठक में राज्य के औद्योगिक विकास, तकनीकी विस्तार और रोजगार सृजन से जुड़ी कई बड़ी योजनाओं पर मुहर लगी।
बिहार बनेगा पूर्वी भारत का नया टेक हब
कैबिनेट ने बिहार को एक उभरते तकनीकी केंद्र के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इसके लिए उच्च स्तरीय समिति बनाई जाएगी, जो निम्नलिखित परियोजनाओं की कार्ययोजना तैयार करेगी:
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डिफेंस कॉरिडोर
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सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पार्क
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ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स
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मेगा टेक सिटी
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फिनटेक सिटी
सरकार का मानना है कि ये परियोजनाएँ बिहार की अर्थव्यवस्था को नए युग की टेक्नोलॉजी आधारित दिशा देंगी और राज्य को पूर्वी भारत का प्रमुख टेक हब बनाएंगी।
न्यू एज इकॉनमी के लिए नई रणनीति
कैबिनेट ने राज्य को अगले पांच वर्षों में वैश्विक बैक-एंड हब और ग्लोबल वर्कप्लेस के रूप में स्थापित करने की नई रणनीति को मंजूरी दी है। इसके लिए एक शीर्ष समिति बनाई जाएगी, जो योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी का काम संभालेगी।
चीनी मिलों के पुनर्जीवन के लिए बड़ा कदम
बिहार के बंद पड़े चीनी मिल उद्योग को पुनर्जीवित करने की दिशा में भी बड़ी घोषणा की गई। सरकार ने निर्णय लिया है कि:
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बंद चीनी मिलों को पुनः चालू किया जाएगा
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नई चीनी मिलों के लिए नीति तैयार होगी
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किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ मिलेगा
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युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
इसके लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति बनाने की मंजूरी दी गई है।
सरकार का दावा है कि इन सभी महत्वपूर्ण निर्णयों से आने वाले वर्षों में बिहार में उद्योगों का विस्तार तेज़ होगा और राज्य में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।