CG: जगदीप धनखड़ बोले- अब हम किसी के मोहताज नहीं, दुनिया ने माना भारत का लोहा, विश्व की संस्थाएं कर रहीं तारीफ

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ आज शनिवार को सुबह में रायपुर पहुंचे। स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट माना में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंद और सीएम विष्णुदेव साय ने उनका स्वागत किया।

CG: जगदीप धनखड़ बोले- अब हम किसी के मोहताज नहीं, दुनिया ने माना भारत का लोहा, विश्व की संस्थाएं कर रहीं तारीफ

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ आज शनिवार को सुबह में रायपुर पहुंचे। स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट माना में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंद और सीएम विष्णुदेव साय ने उनका स्वागत किया।

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने रायपुर के जोरा स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के 38वें स्थापना दिवस समारोह में छात्रों से कहा कि आज के युग में देश में प्रतिभा चमकाने के इतने शुभ अवसर मिले हैं, जितने पहले कभी नहीं थे। अब भारत पूरी तरह से बदल चुका हैं। हमारी सोच बदल चुकी है। अब हम दुनिया में किसी के मोहताज नहीं हैं। हमने अपनी 5000 साल की संस्कृति को सबके सामने रख दिया है। दुनिया ने भी इसे लोहा माना है।  इसे पहचान लिया  है। यही वजह है कि आज का भारत विकास के साथ तेजी से आगे बढ़ रहा है। आज दुनिया की संस्थाएं भारत की तारीफ कर रही हैं। वो कह रही है कि भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व का चमकता हुआ सितारा है। विश्व में तेजी से बढ़ती हुई हमारी अर्थव्यवस्था है। 

उन्होंने कहा कि पहले हम जिन देशों को देखते थे, वो वह हमारे सपने में भी आते थे। कनाडा, यूके, फ्रांस, जर्मनी और जापान को देखकर हम सोचते थे कि क्या ऐसी व्यवस्था हमारे भारत में भी होगी  पर आज यह जमीनी हकीकत है। इस सफलता में हम सब का प्रयास है। सबकी सहभागिता है। हम विश्व के तेजी से उभरते लीडर रूप में कार्य कर रहे हैं। यह भारत के लिए सम्मान का विषय है। एक साल में अमेरिका, यूके, फ्रांस और जर्मनी में जितने डिजिटल ट्रांजेक्शन होते हैं, जबकि हमारे भारत में तीन-चार गुना होते हैं। यह हमारे देश की उपलब्धि है। भारत के युवा शक्ति का कोई मुकाबला नहीं है। ये हमें कभी नहीं भूलना चाहिए। हमें भारतीय होने में गर्व है। हारने के डर से आप कोशिश नहीं करेंगे तो आप आगे नहीं बढ़ पाएंगे। उसमें आपका फायदा कम नुकसान ज्यादा है। कृषि के क्षेत्र में इसकी ज्यादा आवश्यकता है। छात्रों से कहा कि भारत सरकार की जितनी नीतियां हैं, सहकारिता विभाग में क्या-क्या हुआ है ? उनमें से आप कुछ कर सकें तो बदलाव का केंद्र बनेंगे। गांव में क्रांति आएगी। 

'जब प्रोफेसर कुरियन से कहा गया कि भारतीयो से भी सीखें'
उन्होंने एक वाकया को बताते हुए कहा क जब वो 1989 में लोकसभा के सदस्य और केंद्र में मंत्री बने, उस समय अमूल का बहुत बड़ा नाम था और आज भी है। उस दौरान फेमस वैज्ञानिक प्रोफेसर कुरियन को बुलाया गया था। उस दौर में लोकसभा के चार सदस्य थे, जिनसे उनका साक्षात्कार होना था। उस समय वहां के प्रधानमंत्री ने कुरियन से कहा कि तुम बहुत बड़े वैज्ञानिक हो, लेकिन उन्होंने (भारतीयों) तो जन्म ही गांव में लिया है। इनका पांव गोबर में रहा है। इन्होंने गाय और भैंस के थान देखे हैं, इन्होंने कुएं से पानी निकलता हुआ देखा है, खेत में बैल, घोड़े देखे हैं, कुछ उनसे भी सीख लो।