सस्ती और टिकाऊ हाइड्रोजन उत्पादन की दिशा में एक नई खोज

दक्षिण कोरिया के वैज्ञानिकों ने बोरॉन-डोप्ड कोबाल्ट फॉस्फाइड पर आधारित सस्ते और असरदार इलेक्ट्रोकैटलिस्ट विकसित किए हैं, जो जल विघटन से हाइड्रोजन उत्पादन को किफायती और टिकाऊ बना सकते हैं।

सस्ती और टिकाऊ हाइड्रोजन उत्पादन की दिशा में एक नई खोज

दुनिया भर में ग्रीनहाउस गैसों को कम करने और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों की तत्काल आवश्यकता है। हाइड्रोजन को एक स्वच्छ ऊर्जा स्रोत माना जाता है क्योंकि इसमें कार्बन नहीं होता और यह गैसोलीन की तुलना में वजन के हिसाब से अधिक ऊर्जा स्टोर करता है। पानी को बिजली की मदद से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में तोड़ने की प्रक्रिया, जिसे इलेक्ट्रोकेमिकल वॉटर-स्प्लिटिंग कहा जाता है, एक संभावित तरीका है जिससे हाइड्रोजन स्वच्छ तरीके से उत्पादित किया जा सकता है, खासकर जब यह नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के साथ उपयोग किया जाए।

लेकिन इस विधि से बड़े पैमाने पर हाइड्रोजन बनाना महंगा है क्योंकि इसमें दुर्लभ और महंगे धातुओं से बने उत्प्रेरकों (कैटलिस्ट) की आवश्यकता होती है। इस समस्या को सुलझाने के लिए वैज्ञानिक सस्ते और प्रभावी विकल्पों की तलाश कर रहे हैं, जिनमें ट्रांजिशन मेटल फॉस्फाइड्स (TMPs) का नाम प्रमुख है। TMPs हाइड्रोजन उत्पत्ति प्रक्रिया (HER) में अच्छे परिणाम देते हैं, लेकिन ऑक्सीजन उत्पत्ति प्रक्रिया (OER) में कमजोर पड़ जाते हैं। पिछले कुछ शोधों से संकेत मिला था कि अगर इन TMPs में बोरॉन डाला जाए, तो यह दोनों प्रक्रियाओं में सुधार कर सकता है, लेकिन यह तकनीकी रूप से काफी कठिन था।

अब दक्षिण कोरिया की हanyang विश्वविद्यालय की प्रोफेसर सियुंगह्युन ली और उनकी टीम, जिसमें रिसर्चर डन चान चा भी शामिल हैं, ने इस चुनौती का समाधान खोज लिया है। उन्होंने एक नई तकनीक से बोरॉन-डोप्ड कोबाल्ट फॉस्फाइड नैनोशीट्स (B-CoP) बनाए हैं जो सस्ते भी हैं और बेहतर प्रदर्शन भी देते हैं। उन्होंने कोबाल्ट आधारित मेटल-ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क्स (MOFs) का उपयोग किया जो कि नैनो-सामग्री के डिजाइन और संश्लेषण के लिए अत्यंत उपयोगी होते हैं। इसके बाद, सोडियम बोरोहाइड्राइड से बोरॉन डोप किया गया और अलग-अलग मात्रा में सोडियम हाइपॉफॉस्फाइट डालकर फॉस्फोरीकरण किया गया।

इन नैनोशीट्स ने बड़े सतह क्षेत्र और मेसोपोरस संरचना दिखाई, जिससे इनकी इलेक्ट्रोकैटलिटिक गतिविधि में भारी सुधार हुआ। खासकर जिस नमूने को 0.5 ग्राम NaH2PO2 से तैयार किया गया था, उसने सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया। इस सैंपल की OER और HER क्षमता 248 और 95 mV के ओवरपोटेंशियल पर रही, जो कि अब तक के रिपोर्टेड कैटलिस्ट्स से कहीं बेहतर है। जब इस सामग्री से इलेक्ट्रोलाइज़र बनाया गया, तो उसने बहुत कम वोल्टेज (1.59 V) पर काम किया और उच्च करंट डेंसिटी पर भी स्थिरता बनाए रखी। यहां तक कि इसने वर्तमान के सबसे उन्नत इलेक्ट्रोलाइज़रों को भी पीछे छोड़ दिया और 100 घंटे से ज्यादा तक लगातार प्रदर्शन किया।

इस शोध को गणनात्मक मॉडलिंग से भी समर्थन मिला जिससे यह स्पष्ट हुआ कि बोरॉन डोपिंग और फॉस्फोरस कंटेंट को संतुलित करने से रिएक्शन के इंटरमीडिएट्स के साथ इंटरैक्शन बेहतर हुआ, जिससे उत्प्रेरक की क्षमता बढ़ी।

प्रोफेसर ली का कहना है कि यह शोध अगली पीढ़ी के ऐसे उत्प्रेरकों के डिज़ाइन के लिए मार्ग प्रशस्त करता है, जो बड़े पैमाने पर हाइड्रोजन उत्पादन को सस्ता और व्यवहार्य बना सकते हैं। इससे न केवल स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर कार्बन उत्सर्जन को भी घटाने में सहायक होगा।