दूध और जेनेरिक दवाओं में भारत की बढ़त को चुनौती देगा अमेरिकी टैरिफ

अमेरिका के 25% टैरिफ फैसले से भारत के किसानों और फार्मा सेक्टर पर खतरा, एसबीआई रिपोर्ट ने चेताया; दवाओं और दूध उत्पादन पर असर।

दूध और जेनेरिक दवाओं में भारत की बढ़त को चुनौती देगा अमेरिकी टैरिफ

एसबीआई रिसर्च की ताज़ा रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के साथ वस्तु व्यापार पर अमेरिका द्वारा 25% टैरिफ लगाना एक गंभीर नीतिगत गलती साबित हो सकता है। यह कदम न केवल अमेरिकी अर्थव्यवस्था, बल्कि उसके नागरिकों के लिए भी नुकसानदेह होगा। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि भारत को अपनी संप्रभुता, किसानों की सुरक्षा और फार्मा सेक्टर को बचाने के लिए ठोस रणनीतिक कदम उठाने चाहिए।

कृषि में भारत की मजबूती
2015 से 2024 के बीच भारत का दूध उत्पादन 36% बढ़कर 211.7 मिलियन टन हो गया, जबकि यूरोपीय संघ का उत्पादन 165.9 मिलियन टन और अमेरिका का 102.5 मिलियन टन रहा। रिपोर्ट का कहना है कि भारत को किसानों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए टिकाऊ बाजार और कल्याणकारी योजनाओं पर फोकस करना चाहिए।

फार्मा सेक्टर पर असर
भारत अमेरिका की 35% जेनेरिक दवा जरूरतों को पूरा करता है। टैरिफ से उत्पादन को अन्य देशों या अमेरिका में स्थानांतरित करने में 3-5 साल लगेंगे, जिससे अमेरिकी स्वास्थ्य व्यय, जो पहले से ही $15,000 प्रति व्यक्ति और GDP का 17.6% है, और बढ़ जाएगा। इससे मेडिकेयर व मेडिकेड पर भी असर पड़ेगा, जो कुल स्वास्थ्य व्यय का 36% हैं।

DOGE लक्ष्यों पर खतरा
टैरिफ से दवाओं की कीमतें बढ़ेंगी, जो अमेरिका के DOGE उद्देश्यों और सरकारी खर्च कम करने की नीति के खिलाफ है। रिपोर्ट में स्पष्ट चेतावनी है कि भारत को अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत रखते हुए कृषि और फार्मा उद्योग की सुरक्षा करनी होगी।