बिहार चुनाव से पहले चुनाव आयोग की सख्ती, एआई और सिंथेटिक कंटेंट पर नए नियम जारी

चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक अभियानों में एआई और सिंथेटिक कंटेंट के इस्तेमाल पर सख्त नियम जारी किए। अब सभी एआई-जनित सामग्री पर स्पष्ट लेबल और स्रोत का खुलासा जरूरी।

बिहार चुनाव से पहले चुनाव आयोग की सख्ती, एआई और सिंथेटिक कंटेंट पर नए नियम जारी

बिहार विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग (ECI) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सिंथेटिक कंटेंट के उपयोग को लेकर नई सख्त गाइडलाइन जारी की है। आयोग ने सभी राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और प्रचार प्रतिनिधियों को निर्देश दिया है कि वे चुनाव प्रचार के दौरान इस्तेमाल की जाने वाली किसी भी एआई जनित या डिजिटल रूप से बदली गई सामग्री पर स्पष्ट रूप से “AI-Generated, Digitally Enhanced या Synthetic Content” का लेबल लगाएं।

यह लेबल सामग्री के कम से कम 10 प्रतिशत दृश्य क्षेत्र (visible area) को कवर करना अनिवार्य होगा। वहीं ऑडियो कंटेंट के मामले में यह घोषणा पहले 10 प्रतिशत समय अवधि के भीतर स्पष्ट रूप से सुनाई देनी चाहिए।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऐसी सभी एआई या डिजिटल रूप से बदली गई सामग्री में उस संस्था या व्यक्ति का नाम भी अनिवार्य रूप से शामिल होना चाहिए, जिसने सामग्री तैयार की है। यह जानकारी मेटाडाटा या कैप्शन में दी जानी होगी।

चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों को आगाह किया है कि वे किसी भी व्यक्ति की पहचान, आवाज या रूप में बदलाव कर भ्रामक या गलत संदेश प्रसारित न करें। बिना सहमति के किसी व्यक्ति की छवि या आवाज को बदलना अब कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है।

इसके अलावा, आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि अगर किसी राजनीतिक दल या उम्मीदवार की ओर से कोई आपत्तिजनक या भ्रामक एआई सामग्री प्रकाशित होती है, तो उसे तीन घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा। साथ ही सभी राजनीतिक दलों को अपने एआई जनित प्रचार सामग्रियों का रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखना होगा।

इन नए दिशानिर्देशों का उद्देश्य डिजिटल युग में चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी, जिम्मेदार और निष्पक्ष बनाना है ताकि मतदाताओं को भ्रामक या कृत्रिम रूप से तैयार की गई जानकारी से गुमराह न किया जा सके।