त्योहारी सीजन में चमकी भारतीय अर्थव्यवस्था: सोना, चांदी और ऑटो सेक्टर की बिक्री ने तोड़े सभी रिकॉर्ड
भारत में इस साल त्योहारी सीजन के दौरान आर्थिक गतिविधियों में जबरदस्त उछाल देखा गया। धनतेरस पर सोना, चांदी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की बिक्री रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई, जिससे बाजारों में उत्साह का माहौल है।
भारत में इस साल का फेस्टिव सीजन आर्थिक दृष्टि से बेहद उत्साहजनक रहा। जीएसटी सुधारों के बाद पहली बार त्योहारी खरीदारी ने नए रिकॉर्ड बनाए हैं। ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और कीमती धातुओं के बाजार में अभूतपूर्व तेजी देखने को मिली है।
धनतेरस के अवसर पर सोने और चांदी की बिक्री में लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। देशभर के ज्वेलरी बाजारों में लोगों ने बड़ी संख्या में सोना, चांदी और अन्य आभूषण खरीदे। अखिल भारतीय रत्न एवं आभूषण घरेलू परिषद (GJC) के अनुसार, इस बार त्योहारी बिक्री का आंकड़ा 50,000 करोड़ रुपए से अधिक पहुंचने की संभावना है।
जीजेसी के अध्यक्ष राजेश रोकड़े ने बताया कि इस साल लोगों की पसंद में बदलाव देखने को मिला है। हल्की हॉलमार्क ज्वेलरी, सोने के सिक्के और धार्मिक प्रतीक वाले चांदी के उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ी है। चांदी के सिक्कों और पूजा से जुड़े प्रोडक्ट्स की बिक्री में 40 प्रतिशत तक का उछाल देखने को मिला है।
ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी रौनक लौट आई है। टाटा मोटर्स के मुख्य वाणिज्यिक अधिकारी अमित कामत ने कहा कि इस बार धनतेरस और दिवाली के शुभ अवसर पर दो से तीन दिनों में ही 25,000 से अधिक वाहनों की डिलीवरी होने की उम्मीद है। वहीं, हुंडई मोटर इंडिया के निदेशक तरुण गर्ग ने बताया कि इस वर्ष कंपनी की लगभग 14,000 यूनिट्स की डिलीवरी संभव है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 20 प्रतिशत अधिक है।
व्यापारिक संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने भी पुष्टि की है कि इस बार धनतेरस पर पूरे देश में जोरदार खरीदारी हुई। देशभर के बाजारों में कुल व्यापार का आंकड़ा 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक पहुंचने का अनुमान है। इसमें अकेले सोने और चांदी की बिक्री का योगदान 60,000 करोड़ रुपए से ज्यादा रहा।
स्वदेशी उत्पादों की मांग में भी जबरदस्त वृद्धि देखी गई। दिल्ली समेत देश के प्रमुख शहरों में स्थानीय व्यापारियों के पास 10,000 करोड़ रुपए से अधिक का लेनदेन दर्ज किया गया।
कुल मिलाकर, इस साल का फेस्टिव सीजन भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत लेकर आया है। घरेलू उपभोग, निवेश और व्यापार में आई यह तेजी दर्शाती है कि भारत की अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे एक नई ऊंचाई की ओर बढ़ रही है।