भारत की अर्थव्यवस्था में सुस्ती के बावजूद निवेश, व्यापार समझौतों और स्टार्टअप साझेदारी से बढ़ी उम्मीदें

भारत में नवंबर 2025 में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर धीमा पड़ा, लेकिन DPIIT के 50 कंपनियों से समझौतों, भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता की प्रगति और यूपी की IITF भागीदारी ने निवेश माहौल को मजबूत किया।

भारत की अर्थव्यवस्था में सुस्ती के बावजूद निवेश, व्यापार समझौतों और स्टार्टअप साझेदारी से बढ़ी उम्मीदें

भारत की अर्थव्यवस्था में नवंबर 2025 में कुछ सुस्ती देखने को मिली है। HSBC की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, देश के निजी क्षेत्र की वृद्धि छह महीने के निचले स्तर पर पहुंच गई, जबकि मैन्युफैक्चरिंग PMI भी नौ महीने के न्यूनतम स्तर 57.4 तक गिर गया। इसके बावजूद भारत में निवेश और व्यापार सहयोग से जुड़ी कई सकारात्मक खबरों ने बाज़ार में उम्मीदों को बढ़ाया है।

इसी क्रम में, उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने आईटीसी, मर्सिडीज-बेंज, फ्लिपकार्ट जैसी 50 से अधिक कंपनियों के साथ समझौते किए हैं। इन साझेदारियों का उद्देश्य स्टार्टअप्स, विनिर्माण और नवाचार इकोसिस्टम को मजबूत करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे आने वाले महीनों में निवेशक विश्वास और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा।

वहीं दूसरी ओर, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (BTA) को लेकर भी सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। नीति आयोग के सीईओ बी.वी.आर. सुब्रमण्यम ने संकेत दिया कि नवंबर अंत तक दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण प्रगति की घोषणा की जा सकती है। माना जा रहा है कि यह समझौता टेक्नोलॉजी, स्वास्थ्य और सेमीकंडक्टर सेक्टर में नए अवसर खोलेगा।

इसके अतिरिक्त, उत्तर प्रदेश ने भी 44वें इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर (IITF) में “पार्टनर स्टेट” के रूप में हिस्सा लेने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार “लोकल टू ग्लोबल” रणनीति के तहत MSME, पारंपरिक हस्तशिल्प, कृषि उत्पाद और स्टार्टअप इनोवेशन को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करेगी।

इन सभी घटनाक्रमों के बीच विशेषज्ञ मानते हैं कि भले ही मैन्युफैक्चरिंग वृद्धि में थोड़ी गिरावट दिखी हो, लेकिन निवेश, नीतिगत सुधार और वैश्विक साझेदारियों से भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी रहेगी।