भारत बनेगा सेमीकंडक्टर उत्पादन में वैश्विक महाशक्ति
भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार में उभरता सितारा बन रहा है। भारत सेमीकंडक्टर मिशन और DLI जैसी योजनाएं देश को चिप निर्माण के वैश्विक मंच पर शीर्ष पंक्ति में लाने की दिशा में अग्रसर हैं।
सेमीकंडक्टर आज की आधुनिक तकनीकों का मूल आधार बन चुके हैं और इनकी मांग वैश्विक स्तर पर लगातार बढ़ रही है। हालांकि, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कुछ गिने-चुने भौगोलिक क्षेत्रों तक सीमित है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन काफी नाजुक बन चुकी है। इस परिस्थिति ने विश्वभर में उत्पादन के विविधीकरण की आवश्यकता को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। ऐसे में भारत एक अहम खिलाड़ी के रूप में उभरकर सामने आ रहा है।
ग्लोबल सेमीकंडक्टर मार्केट के 2030 तक 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के आंकड़े को छूने की संभावना है, और इसमें भारत की हिस्सेदारी भी बड़ी होगी। ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग (ईएसडीएम) एक प्रमुख क्षेत्र बन चुका है। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन और सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम जैसी सरकारी पहलें इस उद्योग के लिए एक ठोस इकोसिस्टम बनाने में सहायक रही हैं।
2025 में केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नोएडा और बेंगलुरु में दो अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर डिजाइन सुविधाओं का उद्घाटन किया। ये केंद्र भारत के पहले ऐसे सेंटर हैं, जो एडवांस 3-नैनोमीटर चिप डिजाइन पर काम करेंगे और देश की तकनीकी यात्रा में मील का पत्थर साबित होंगे।
भारत सरकार की डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) योजना और चिप्स टू स्टार्टअप (C2S) कार्यक्रम से जुड़े स्टार्टअप तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। उदाहरण के लिए, स्मार्ट विजन और सीसीटीवी जैसे एप्लिकेशन के लिए चिप बनाने वाली कंपनी नेत्रसेमी को सरकारी सहयोग के चलते 107 करोड़ रुपए का उद्यम पूंजी निवेश प्राप्त हुआ। इस सफलता को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री ने भी सराहा और कहा कि इससे भारत में मौजूद डिजाइन क्षमताओं को मजबूती मिलेगी।
2022 में शुरू हुई DLI योजना के अंतर्गत सरकार ने 22 कंपनियों को 234 करोड़ रुपये की सहायता देने की प्रतिबद्धता जताई थी, जिनकी कुल परियोजना लागत 690 करोड़ रुपए रही। इन कंपनियों ने अब तक 380 करोड़ रुपए से अधिक का निजी निवेश जुटाया है। इनमें से पांच स्टार्टअप पहले ही अपने डिज़ाइन को वैश्विक चिप मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के साथ निर्माण और परीक्षण की प्रक्रिया में ला चुके हैं। इसके साथ ही 72 से अधिक कंपनियों को एडवांस सॉफ्टवेयर टूल्स तक पहुंच दी गई है ताकि वे चिप डिजाइनिंग में सक्षम बन सकें।
आईआईटी हैदराबाद के दीक्षांत समारोह में केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने कहा कि भारत अब पूंजीगत उपकरणों और सेमीकंडक्टर निर्माण सामग्री के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर है। उनका मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत सेमीकंडक्टर उत्पादन में दुनिया के शीर्ष 5 देशों में शामिल हो जाएगा। भारत सेमीकंडक्टर मिशन का उद्देश्य देश में एक सशक्त सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले निर्माण प्रणाली तैयार करना है ताकि भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स डिज़ाइन और निर्माण का एक वैश्विक केंद्र बनाया जा सके।