स्वतंत्रता दिवस भाषण के लिए पीएम मोदी ने मांगे देशवासियों से सुझाव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगामी स्वतंत्रता दिवस भाषण के लिए देशवासियों से सुझाव और विचार साझा करने का आह्वान किया। उन्होंने ‘MyGov’ और ‘NaMo App’ के जरिए अपने सुझाव भेजने की अपील की।

स्वतंत्रता दिवस भाषण के लिए पीएम मोदी ने मांगे देशवासियों से सुझाव

पीएम मोदी ने नागरिकों से मांगे विचार
15 अगस्त 2025 को भारत के 79वें स्वतंत्रता दिवस के लिए तैयारियां पूरे देश में तेज़ी से चल रही हैं। इस अवसर को और अधिक सहभागी बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से सीधे संवाद साधा है। उन्होंने अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण के लिए नागरिकों से सुझाव और विचार साझा करने का अनुरोध किया है।

सोशल मीडिया पर साझा किया पोस्ट


प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि वे देशवासियों से जानना चाहते हैं कि इस बार के स्वतंत्रता दिवस भाषण में कौन-कौन से मुद्दे शामिल किए जाएं। उन्होंने कहा कि ‘MyGov’ और ‘NaMo App’ के ओपन फोरम के माध्यम से अपने विचार साझा करें।

पीएम की वेबसाइट पर भी मांगे गए सुझाव
नरेंद्र मोदी की आधिकारिक वेबसाइट पर भी नागरिकों से सुझाव मांगे गए हैं। वहां लिखा है कि आपके विचार प्रधानमंत्री के भाषण का हिस्सा बन सकते हैं। भारत की आज़ादी के 79 साल पूरे होने के अवसर पर यह एक महत्वपूर्ण मौका है, जिसमें आम जनता सीधे राष्ट्र प्रमुख से संवाद कर सकती है।

पिछले साल भी मिला था भरपूर समर्थन
यह पहला मौका नहीं है जब प्रधानमंत्री ने अपने भाषण के लिए देशवासियों से सुझाव मांगे हैं। 2024 में 78वें स्वतंत्रता दिवस पर भी उन्होंने इसी तरह का आह्वान किया था और भाषण में इन विचारों का उल्लेख भी किया था। तब उन्होंने कहा था कि “विकसित भारत 2047” सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा अभियान है जिसमें देश के हर नागरिक का सपना और संकल्प शामिल है।

लोकतंत्र को अधिक सहभागी बनाने की पहल
प्रधानमंत्री मोदी की यह पहल लोकतंत्र को अधिक जीवंत और सहभागी बनाने का प्रतीक मानी जा रही है। जब आम लोग अपनी बात देश के प्रधानमंत्री तक पहुंचा सकते हैं और उसका असर राष्ट्रीय मंच पर दिखाई देता है, तो यह एक नई लोकतांत्रिक शक्ति का उदाहरण बन जाता है।

भारत की आजादी के 100 वर्षों की ओर बढ़ते हुए यह संवाद न केवल राष्ट्र के भविष्य को दिशा देगा, बल्कि नागरिकों को भी यह अहसास कराएगा कि उनका विचार देश की नीति और नेतृत्व में एक अहम स्थान रखता है।