न्यायिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने रायपुर में संभागीय सेमिनार का आयोजन
रायपुर में आयोजित संभागीय न्यायिक सेमिनार में 126 न्यायिक अधिकारियों ने भाग लिया, मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने जमानत, रिमांड, उत्तराधिकार कानून जैसे विषयों पर दिशा-निर्देश दिए।
छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी द्वारा रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में रायपुर संभाग के चार जिलों – रायपुर, धमतरी, बलौदाबाजार और महासमुंद – के न्यायिक अधिकारियों के लिए एक दिवसीय संभागीय न्यायिक सेमिनार का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कुल 126 न्यायिक अधिकारियों ने भाग लिया।
सेमिनार का शुभारंभ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री रमेश सिन्हा ने किया। उन्होंने न्यायाधीशों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में न्यायपालिका से निष्पक्षता, संवेदनशीलता और शीघ्र न्याय की अपेक्षाएं बहुत अधिक हैं। उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया सिर्फ तकनीकी अनुपालन नहीं है, बल्कि यह जनता के विश्वास, स्वतंत्रता की रक्षा और निष्पक्ष न्याय का आधार है।
मुख्य न्यायाधीश ने हाल ही में लागू किए गए भारतीय न्याय संहिताओं (जैसे BNS, BNSS) और विशेष रूप से जमानत से संबंधित प्रावधानों की जानकारी को अत्यंत आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि किसी आरोपी के अधिकारों की रक्षा के लिए, न्यायिक अधिकारियों को मामले की प्रत्येक जानकारी गहनता से जांचनी चाहिए ताकि निर्णय विधिक शुद्धता से हो और आरोपी की स्वतंत्रता बाधित न हो।
कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में प्रतिभागियों ने प्रकरणों के शीघ्र निपटान, गिरफ्तारी, रिमांड और जमानत, अभियुक्त की परीक्षण प्रक्रिया, तथा हिंदू उत्तराधिकार कानून जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया।
मुख्य न्यायाधीश श्री सिन्हा ने कहा कि यह कार्यशाला केवल एक अकादमिक अभ्यास नहीं बल्कि आत्मनिरीक्षण, ज्ञान-संवर्धन और संस्थागत सशक्तिकरण का मंच है। उन्होंने न्यायिक अधिकारियों से अपील की कि वे इस सेमिनार के अनुभवों को अपने न्यायिक कार्य में ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ लागू करें।
इस आयोजन में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के माननीय न्यायमूर्ति श्री नरेश कुमार चंद्रवंशी, न्यायमूर्ति श्री दीपक कुमार तिवारी एवं न्यायमूर्ति श्री राकेश मोहन पांडेय सहित राज्य न्यायिक अकादमी के निदेशक और रजिस्ट्रार जनरल भी उपस्थित रहे।