'पेड़ के बदले पेन' मुहिम: पर्यावरण संरक्षण की अनूठी पहल
बेगूसराय जिले के खोदावंदपुर प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, दौलतपुर नवटोलिया में एक अनोखी मुहिम चलाई जा रही है, जिसका उद्देश्य लावारिस फलदार पौधों को संरक्षण प्रदान करना है।
बेगूसराय जिले के खोदावंदपुर प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, दौलतपुर नवटोलिया में एक अनोखी मुहिम चलाई जा रही है, जिसका उद्देश्य लावारिस फलदार पौधों को संरक्षण प्रदान करना है। इस अभियान का नाम है "पेड़ के बदले पेन" । इस अभिनव पहल के पीछे हैं विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक मोहम्मद अब्दुल्ला , जिन्हें उनके पर्यावरण संरक्षण के नवाचार के लिए सराहा जा रहा है।
इस मुहिम के अंतर्गत विद्यालय के छात्र-छात्राएं कक्षा 4 से 8 तक के बच्चे अपने क्षेत्र से लावारिस आम की गुठलियों से उगे पौधे विद्यालय लेकर आते हैं। बदले में उन्हें एक पेन देकर प्रोत्साहित किया जाता है, जिससे उनमें पर्यावरण के प्रति जागरूकता उत्पन्न हो रही है।
मोहम्मद अब्दुल्ला यह मुहिम पिछले चार वर्षों से चला रहे हैं। अब तक 2500 से अधिक आम के पौधे इकट्ठा किए जा चुके हैं, जो लावारिस गुठलियों से उगे थे। इन पौधों को वह कृषि विज्ञान केंद्र, खोदावंदपुर को सौंप देते हैं ताकि उन्हें सुरक्षित स्थान पर रोपित किया जा सके। उन्होंने बताया कि अक्सर ये पौधे जानवरों द्वारा खा लिए जाते हैं, इसलिए इन्हें संरक्षण की आवश्यकता थी।
मोहम्मद अब्दुल्ला ने यह विचार तब किया जब वे पढ़ाई में पीछे रह गए बच्चों से मिलने उनके घर गए और वहां उन्होंने कई लावारिस पौधों को बढ़ते देखा। तभी उनके मन में यह विचार आया कि इन पौधों को भी एक आश्रय मिलना चाहिए।
इस मुहिम में न सिर्फ बच्चे बल्कि उनके अभिभावक भी बढ़-चढ़कर सहयोग कर रहे हैं। मोहम्मद अब्दुल्ला के इस प्रयास को सराहते हुए, कृषि विज्ञान केंद्र, खोदावंदपुर के वरीय वैज्ञानिक डॉ. रामपाल ने उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। डॉ. रामपाल ने कहा, “वास्तव में यह एक उत्कृष्ट प्रयास है जो पर्यावरण संरक्षण को नई दिशा दे रहा है।”
इस पहल से न केवल लावारिस पौधों को नया जीवन मिल रहा है, बल्कि छात्र-छात्राओं में भी प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित हो रही है।