वाराणसी में शुरू हुआ ‘हेरिटेज एंड इंडिजिनस टेक्सटाइल्स’ अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम

वाराणसी स्थित ICUTE BHU में ‘हेरिटेज एंड इंडिजिनस टेक्सटाइल्स’ पर अंतरराष्ट्रीय प्रमाणपत्र कार्यक्रम शुरू हुआ। 16 देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी से भारतीय पारंपरिक वस्त्रों को वैश्विक पहचान मिलेगी।

वाराणसी में शुरू हुआ ‘हेरिटेज एंड इंडिजिनस टेक्सटाइल्स’ अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम

वाराणसी स्थित ICUTE, बीएचयू में वस्त्र मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में ‘हेरिटेज एंड इंडिजिनस टेक्सटाइल्स’ पर अंतरराष्ट्रीय प्रमाणपत्र कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम की शुरुआत ने न केवल भारतीय पारंपरिक हैंडलूम और वस्त्रों की धरोहर को नई दिशा दी है, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की मजबूत पहल भी की है।

उद्घाटन अवसर पर देश-विदेश से बड़ी संख्या में विशेषज्ञ और प्रतिभागी शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारतीय परंपरागत हैंडलूम वस्त्रों के संरक्षण, संवर्धन और उन्हें वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करना है। भारत की प्राचीन वस्त्र परंपराएं जैसे बनारसी, इकट, खादी और अन्य हैंडलूम कला, अपनी उत्कृष्टता और सांस्कृतिक पहचान के लिए विश्वभर में प्रशंसा पाती रही हैं। यह प्रमाणपत्र कार्यक्रम इन्हीं परंपराओं को नए स्वरूप और वैश्विक अवसर प्रदान करने का माध्यम बनेगा।

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ हैंडलूम टेक्नोलॉजी के निदेशक डॉ. अमीन हिरेनभाई नवीनभाई ने कहा कि इस पहल से दुनिया भारत के हस्तशिल्प और पारंपरिक वस्त्रों की समृद्ध धरोहर से और गहराई से परिचित होगी। उन्होंने बताया कि इस बार कार्यक्रम में 16 देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवाद, शोध और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को नई गति मिलेगी।

इस अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम से न केवल भारतीय हैंडलूम और टेक्सटाइल्स को वैश्विक पहचान मिलेगी बल्कि देश के बुनकरों और कारीगरों को भी नए अवसर प्राप्त होंगे। वाराणसी जैसे प्राचीन नगरी में इस तरह का आयोजन भारत की सांस्कृतिक धरोहर और कारीगरी की सजीवता को दर्शाता है।