नालंदा छठ हादसा: अलग-अलग घटनाओं में सात की डूबकर मौत
बिहार के नालंदा जिले में छठ पर्व के दौरान सात लोगों की डूबने से मौत हो गई। सिपारा गांव में चार की मौत, एसडीआरएफ की खोज जारी।
छठ पूजा में नालंदा में बड़ा हादसा: अलग-अलग जगहों पर सात लोगों की डूबकर मौत
सिपारा गांव में लोकाईन नदी में चार श्रद्धालु डूबे
बिहार के नालंदा जिले में पवित्र छठ पर्व के दौरान खुशियों के बीच दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। जिले के विभिन्न छठ घाटों पर सात लोगों की डूबने से मौत हो गई। सबसे गंभीर घटना हिलसा प्रखंड के सिपारा गांव में घटी, जहां चार श्रद्धालु लोकाईन नदी में डूब गए।
हिलसा अनुमंडलाधिकारी अमित कुमार ने बताया कि रेड़ी पंचायत के सिपारा गांव में छठ पर्व के दौरान नदी में स्नान और अर्घ्य अर्पित करने के दौरान यह हादसा हुआ। उन्होंने कहा, “तीन शव बरामद कर लिए गए हैं, जबकि चौथे व्यक्ति की तलाश में एसडीआरएफ टीम लगातार तलाशी अभियान चला रही है।”
घटना के बाद पूरे क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है। जहां एक ओर लोग सूर्य उपासना में डूबे थे, वहीं दूसरी ओर हादसे की खबर ने वातावरण को शोकमय बना दिया।
अन्य प्रखंडों में भी तीन लोगों की डूबकर मौत
हिलसा के अलावा, जिले के अन्य हिस्सों में भी छठ पर्व के दौरान तीन और डूबने की घटनाएं सामने आईं।
अस्थावां, नगरनौसा और सारे थाना क्षेत्र से एक-एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि की गई है। पुलिस ने बताया कि इन सभी घटनाओं में श्रद्धालु नदी और तालाबों में स्नान या अर्घ्य देने के दौरान अचानक गहराई में चले गए और बाहर नहीं निकल पाए।
स्थानीय ग्रामीणों और पुलिस की मदद से शवों को बाहर निकाला गया और पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। सभी मृतक स्थानीय निवासी बताए जा रहे हैं।
प्रशासन ने जारी की चेतावनी, सतर्क रहने की अपील
लगातार हो रही डूबने की घटनाओं को देखते हुए नालंदा पुलिस और प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे छठ पूजा के दौरान सावधानी और सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन करें।
एसडीएम अमित कुमार ने कहा, “छठ घाटों पर भीड़ के समय बच्चों और बुजुर्गों को पानी में जाने से रोका जाए। साथ ही, गहराई वाले इलाकों में बैरिकेडिंग और रौशनी की व्यवस्था अनिवार्य होनी चाहिए।”
जिला प्रशासन ने सभी पंचायत प्रतिनिधियों और थानेदारों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र के घाटों पर गश्त बढ़ाएं और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराएं।
छठ पर्व और सुरक्षा की चुनौती
छठ पूजा बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश का सबसे प्रमुख सूर्य उपासना पर्व है, जिसमें लाखों श्रद्धालु सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करने के लिए नदी, तालाब और झीलों में जाते हैं। लेकिन हर साल इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था की कमी और अनजाने में गहराई में जाने से ऐसे हादसे सामने आते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि छठ जैसे बड़े आयोजनों में जलाशयों की सफाई, सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी और पर्याप्त रोशनी जैसी व्यवस्थाएँ पहले से सुनिश्चित होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियाँ टाली जा सकें।
शोक में डूबा सिपारा गांव
सिपारा गांव में चार लोगों की मौत से पूरा इलाका गमगीन है। ग्रामीणों का कहना है कि यह हादसा तब हुआ जब श्रद्धालु एक-दूसरे की मदद करते हुए अर्घ्य अर्पण कर रहे थे, तभी अचानक गहराई में चले गए।
पीड़ित परिवारों के घरों में मातम का माहौल है। स्थानीय प्रशासन ने मृतकों के परिवारों को आपदा राहत कोष से आर्थिक सहायता देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
छठ पूजा का यह हादसा एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि धार्मिक आस्था के साथ सुरक्षा जागरूकता भी उतनी ही जरूरी है। नालंदा जिला प्रशासन ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए घाटों पर स्थायी सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की बात कही है।