भारत की सौर परंपरा पर विशेष प्रदर्शनी का शुभारंभ, 142 विद्यार्थियों ने दिखायी गहरी रुचि
विश्व विरासत सप्ताह 2025 के तहत भोपाल राज्य संग्रहालय में भारत की सौर परंपरा पर विशेष प्रदर्शनी शुरू हुई, जिसमें प्राचीन शैलचित्रों से लेकर मध्यकालीन सौर प्रतिमाओं तक का अनोखा प्रदर्शन किया गया। लगभग 142 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
विश्व विरासत सप्ताह 2025 के अंतर्गत राज्य संग्रहालय भोपाल में भारत की सौर परंपरा विषयक विशेष प्रदर्शनी का शुभारंभ किया गया। यह प्रदर्शनी संचालनालय पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय द्वारा विभागाध्यक्ष उर्मिला शुक्ला के निर्देशन में शुरू की गई। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई, जिसमें संयुक्त संचालक डॉ. मनीषा शर्मा, उपसंचालक नीलेश लोखण्डे, संग्रहाध्यक्ष नम्रता यादव, इंद्रपाल यादव और मनोहर उईके उपस्थित रहे।
प्रदर्शनी में सूर्य के महत्व और भारतीय संस्कृति में उसकी परंपरा को दर्शाते हुए विविध ऐतिहासिक अवशेषों को आकर्षक रूप से प्रदर्शित किया गया। इसमें आदिमानव काल के शैलचित्र, सिंधु सभ्यता से प्राप्त पात्रावशेष, प्राचीन आहत मुद्राएं और शुंग, कुषाण, गुप्त तथा उत्तरगुप्त काल की सौर प्रतिमाएं शामिल हैं। इस संग्रह में 15वीं और 16वीं शताब्दी की दुर्लभ सौर मूर्तियां भी दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बनीं।
धरोहर विषय पर आधारित प्रश्नोत्तरी भी आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों ने विशेष उत्साह दिखाया। लगभग 142 छात्रों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और आहत मुद्राओं, वैदिक साहित्य, कुषाण काल की प्रतिमाओं तथा कश्मीर के 8वीं शताब्दी के देवालय से जुड़ी जानकारी को समझने में गहरी जिज्ञासा व्यक्त की।
यह विशेष प्रदर्शनी आज से 25 नवंबर तक राज्य संग्रहालय में जारी रहेगी और भारत की समृद्ध सौर परंपरा को समझने का अनूठा अवसर प्रदान करेगी।