Lok Sabha Election: जब नेहरू व इंदिरा ने सरजू को दिया था मंत्री पद का ऑफर; गाजीपुर में CPI के संस्थापक रहे
एक आंदोलन में उन्हें सर्वाधिक 42 साल की सजा हुई।
एक आंदोलन में उन्हें सर्वाधिक 42 साल की सजा हुई।
1967 के आम चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के वीएस गहमरी एवं 1971 के चुनाव में श्रीनारायण सिंह को परास्त कर संसद पहुंचे। हालांकि 1977 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
गाजीपुर कलेक्ट्रेट स्थित तहसील के सामने एक पार्क है, जिसे लोग सरजू पांडेय पार्क के नाम से जानते हैं। स्वतंत्रता आंदोलन में अंग्रेजों से लोहा लेने वाले सरजू पांडेय गाजीपुर और रसड़ा सीट से दो-दो बार सांसद रहे हैं। यह पार्क जिले में आंदोलन स्थल के रूप में भी जाना जाता है।
आए दिन यहां से धरना-प्रदर्शन की खबरें सामने आती हैं। हो भी क्यों न जिस सरजू पांडेय के नाम से पार्क है, वे हमेशा जुल्म के खिलाफ आवाज उठाते थे, और दूसरों को भी प्रेरणा देते थे। वे कहते थे, डरो मत, जुल्म के खिलाफ आवाज उठाओ। उन्होंने जीवन में विचारों और सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। जवाहर लाल नेहरू ने कांग्रेस में आने और मंत्री पद का प्रस्ताव भी दिया था, लेकिन उन्होंने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया था।
सरजू पांडेय ने जीवन पर्यंत दलितों व पिछड़ों के साथ रहकर उनके उत्थान के लिए संघर्ष किया। 1936 में वह कासिमाबाद में चल रहे कांग्रेस कौमी सेवादल में प्रशिक्षण प्राप्त कर आजादी की लड़ाई में कूद पड़े। उन्हें सामंतों से काफी चिढ़ थी। जमींदारों के जुल्म के घोर विरोधी थे। 1942 में उनके नेतृत्व में भीड़ ने कासिमाबाद थाने को फूंक कर उस पर तिरंगा फहरा दिया था। इस आंदोलन में उन्हें सर्वाधिक 42 साल की सजा हुई।