पटना में रिश्वतखोर डाटा एंट्री ऑपरेटर गिरफ्तार, भ्रष्टाचार पर सख्ती
पटना में निगरानी ब्यूरो ने डाटा एंट्री ऑपरेटर मनोज कुमार को ₹20,000 रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है।
राजधानी पटना में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने डाटा एंट्री ऑपरेटर सह क्लर्क मनोज कुमार को ₹20,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी सचिवालय स्थित कोषागार भवन के कक्ष में हुई, जो निर्माण भवन और विश्वेश्वरैया भवन के समीप स्थित है।
रिश्वत रकम रिटायर्ड इंजीनियर योधन चौधरी से सेवा निवृत्ति लाभ जारी करने के एवज में मांगी गई थी। शिकायत मिलने के बाद निगरानी ब्यूरो ने योजना बनाकर कार्रवाई अंजाम दी।
आरोपी और बरामद राशि
गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान डाटा एंट्री ऑपरेटर मनोज कुमार के रूप में हुई। इस कार्रवाई में ₹20,000 नकद राशि बरामद की गई, जिसे आरोपी रिश्वत के रूप में ले रहा था।
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के डीआईजी जितेंद्र सिंह गंगवार ने जनता से अपील की है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी जानकारी या शिकायत सीधे कार्यालय में दर्ज कराएं ताकि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जा सके।
भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार कार्रवाई
अब तक निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बिहार में 88 भ्रष्टाचार मामले दर्ज किए हैं। इनमें से 82 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और ₹28 लाख 18 हजार रुपए की अवैध राशि बरामद की गई है।
पिछले वर्षों की तुलना में यह कार्रवाई एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है और यह संदेश देती है कि सरकारी कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों और कर्मियों पर सख्त निगरानी है।
भविष्य में और सख्ती की योजना
डीआईजी जितेंद्र सिंह गंगवार ने कहा कि भ्रष्टाचार रोकने के लिए निगरानी ब्यूरो लगातार सक्रिय है। भविष्य में और अधिक गहन जांच और छापेमारी के माध्यम से भ्रष्ट अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी जाएगी।
उन्होंने आम लोगों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की भ्रष्टाचार सूचना को तुरंत साझा करें, ताकि पटना और बिहार में सरकारी कामकाज को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाया जा सके।
पटना में मनोज कुमार की गिरफ्तारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि राज्य सरकार और निगरानी अन्वेषण ब्यूरो भ्रष्टाचार के खिलाफ शून्य सहन नीति पर काम कर रही हैं। लगातार कार्रवाई और सतर्क निगरानी के कारण जिले में भ्रष्टाचार के मामलों में कमी आएगी और जनता का विश्वास सरकारी संस्थानों पर बढ़ेगा।