विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर सीएम योगी ने बलिदानियों को किया नमन
14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर सीएम योगी, केशव प्रसाद मौर्य और सीएम पुष्कर सिंह धामी ने 1947 के विभाजन की त्रासदी को याद करते हुए बलिदानियों और विस्थापितों को श्रद्धांजलि दी।
भारत 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ मना रहा है। आजादी के साथ हुए 1947 के विभाजन ने लाखों भारतीयों को हिंसा, विस्थापन और पीड़ा का सामना कराया। यह दिन उन संघर्षों और बलिदानों की स्मृति में मनाया जाता है, जिनकी वजह से देश को अपनी आजादी की भारी कीमत चुकानी पड़ी। इस अवसर पर देशभर में बलिदानियों और विस्थापितों को नमन किया जा रहा है।
सीएम योगी आदित्यनाथ का बयान
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 14 अगस्त को भारतीय इतिहास की एक बड़ी त्रासदी करार देते हुए विभाजन के दंश को झेलने वालों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “15 अगस्त के ही दिन, संकीर्ण मजहबी कट्टरता और नफरत की नीतियों ने भारत माता को बांटने का षड्यंत्र रचा। इसकी परिणति दंगों, निर्दोषों की हत्याओं और मानवता की पीड़ा के रूप में हुई। भारत विभाजन की अमानवीय वेदना के अवसर पर हम असंख्य विस्थापितों, बलिदानियों और अनाम पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। हमारा संकल्प है कि यह पीड़ा फिर किसी पीढ़ी को न झेलनी पड़े।”
केशव प्रसाद मौर्य की प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने लिखा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस भारत के इतिहास की सबसे हृदयविदारक त्रासदी की याद दिलाता है। उन्होंने कहा, “देश का विभाजन अनगिनत निर्दोषों के लिए हिंसा, पीड़ा और विस्थापन की भयानक स्मृति बनकर रह गया। यह दिवस उन सभी बलिदानियों और विस्थापितों को स्मरण करने का अवसर है, जिन्होंने अपना घर, परिजन, पहचान और भविष्य तक खो दिया।”
सीएम पुष्कर सिंह धामी का संदेश
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘एक्स’ पर लिखा, “विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर उन सभी दिवंगत आत्माओं को नमन, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य और साहस दिखाया। सांप्रदायिक विभाजन ने असंख्य परिवारों को उजाड़ा और देश की आत्मा को आहत किया। लाखों परिवार अपने घर, आँगन और स्मृतियों से वंचित होकर विस्थापन की वेदना झेलने को मजबूर हुए। यह घटना मात्र इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि हमारी राष्ट्रीय चेतना में अंकित एक शाश्वत पीड़ा है।”