राजस्थान नहीं 'बागिस्थान' चुनाव: ये 15 बागी बिगाड़ सकते हैं सत्ता का समीकरण
राजस्थान में 6 नवंबर को नामांकन भरने की तारीख खत्म होने के साथ ही कई सीटों पर लड़ाई दिलचस्प हो गई है. दरअसल 200 सीटों में से एक सीटें ऐसी हैं जहां निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में बागी नेताओं ने नामांकन दाखिल करके कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के सियासी समीकरण को उलझा दिया है. ज्यादातर ये वो लोग हैं जो पूर्व विधायक, पूर्व-मंत्री या वर्तमान विधायक हैं और विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने के कारण बागी हुए और ताल ठोक कर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भर दिया है. यहां तक की झोटवाड़ा, खंडेला जैसी कुछ सीटें तो ऐसी है जहां इन निर्दलीय नेताओं की सभाओं में इतनी भीड़ उमड़ रही है जितनी कांग्रेस और बीजेपी की सभाओं ने नहीं उमड़ी. इस भीड़ को देखते हुए दोनों ही प्रमुख पार्टियों ने रूठों को मनाने का काम शुरू कर दिया है. 9 नवंबर को नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख है. ऐसे में पार्टी दो दिन रूठों को मनाएगी, लेकिन अगर ये नेता नहीं मानते हैं तो उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा. फिलहाल लगभग 33 सीटों पर बागी नेताओं ने बीजेपी और कांग्रेस की नींद उड़ा रखी है. ऐसे में इस रिपोर्ट में उन 15 ताकतवर नेताओं और उनकी सीटों के बारे में जानते हैं जिन्होंने बीजेपी और कांग्रेस छोड़ निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरने का फैसला किया है और ये नेता कैसे दोनों बड़ी पार्टियों के लिए कैसे हो सकते हैं. कौन हैं वो 15 नेता 1. झोटवाड़ा- राजपाल सिंह शेखावत (बीजेपी से बागी) भारतीय जनता पार्टी ने राजस्थान में 41 प्रत्याशियों की लिस्ट जारी की है जिसमें से सबसे बड़ी विधानसभा सीट झोटवाड़ा से जयपुर ग्रामीण के सांसद कर्नल राज्यवर्धन सिंह को प्रत्याशी बनाया है. इसी सीट से राजपाल सिंह शेखावत ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे हैं. शेखावत बीजेपी के बागी नेताओं की लिस्ट में शामिल है. वह झोटवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से ही पूर्व में दो बार विधायक भी रह चुके हैं और सरकार में मंत्री भी रहे है. इस विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने उनका टिकट काट दिया जिससे नाराज शेखावत ने ये कदम उठाया है. झोटवाड़ा विधानसभा सीट जयपुर ग्रामीण में आती है. यहां 4 लाख 20 हजार वोटर्स हैं. इस सीट को पिछले विधानसभा चुनावों से भाजपा का गढ़ माना जाता है. साल 2013 व 2018 राजपाल सिंह शेखावत यहां लगातार 2 बार विधायक बने थे. हालांकि जनता में विधायक को लेकर नाराजगी के कारण साल 2018 में बीजेपी को यह सीट खोनी पड़ी थी. अब जनता की इसी नाराजगी को खत्म करने के लिए इस बार बीजेपी ने कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को मैदान में उतारा है. ऐसे में राजपाल सिंह शेखावत का भी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरना बीजेपी के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है. शेखावत की एंट्री के कारण झोटवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में त्रिकोणीय समीकरण बन गया हैं. 2. डीडवाना- यूनुस खान (बीजेपी के बागी) चुनाव से पहले राजस्थान में टिकट को लेकर पार्टियों में घमासान देखने को मिल रहा था. कई नेता टिकट कट जाने से नाराज नजर आ रहे थे इसी क्रम में वसुंधरा राजे के विश्वासपात्र यूनुस खान ने भी कुछ दिन पहले ही पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया है. यूनुस खान ने डीडवाना विधानसभा सीट से टिकट नहीं मिलने पर ये फैसला लिया था. खान ने उसी वक्त कहा था कि वह डीडवाना से निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे. राजस्थान की राजनीति में यूनुस खान को वसुंधरा राजे का सबसे करीबी माना जाता है. इसके अलावा यूनुस खान राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी का बड़ा अल्पसंख्यक चेहरा भी रहे हैं. वह डीडवाना सीट के दो बार विधायक भी रहे चुके हैं. पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने खान को कांग्रेस के दिग्गज नेता सचिन पायलट के खिलाफ टोंक से चुनाव मैदान में उतारा था. लेकिन इन चुनाव में पायलट की जीत हुई थी.वे पूर्ववर्ती बीजेपी की राजे सरकार में परिवहन मंत्री रहे थे. 3. शिव- रविन्द्र भाटी (बीजेपी के बागी) युवा नेता रविन्द्र भाटी ने कुछ दिन पहले एक बीजेपी का दामन थामा था, हालांकि पार्टी की तरफ से टिकट नहीं दिए जाने पर उन्होंने नौ दिन में ही बगावत कर दी और फिर बाड़मेर जिले की शिव विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनावी मैदान में उतर गए. अब इस युवा नेता के साथ चल रही हजारों तादाद में युवाओं की भीड़ ने कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही पार्टियों की चिंता बढ़ा दी है. युवा नेता रविन्द्र भाटी वहीं हैं जो साल 2019 में जयनारायण व्यास यूनिवर्सिटी से एबीवीपी (ABVP) से छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन वहां उन्हें टिकट नहीं मिला. जिसके बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला लिया और रिकॉर्ड जीत हासिल की थी. आंदोलन और आक्रामक रवैया रखने वाले भाटी अब यूथ के बीच खासा पॉपुलर नाम हैं. 4. खंडेला- बंशीधर बाजिया (बीजेपी के बागी) सीकर की खंडेला विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी से 2 बार विधायक रह चुके और पूर्व चिकित्सा राज्य मंत्री रहे बागी नेता बंशीधर बाजिया ने इस विधानसभा चुनाव में खंडेला सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया है. इसी सीट पर बीजेपी ने सुभाष मील को अपना उम्मीदवार घोषित किया है. सुभाष ने कांग्रेस पार्टी से टिकट नहीं दिए जाने पर बीजेपी ज्वाइन की और उन्हें ज्वाइन करने के 24 घंटे के भीतर ही बीजेपी ने उन्हें खंडेला सीट का प्रत्याशी घोषित कर दिया था. 5. बाड़मेर- प्रियंका चौधरी (बीजेपी के बागी) भारतीय जनता पार्टी से बाड़मेर सीट पर टिकट मिलने की उम्मीद लगाए बैठी डॉ. प्रियंका चौधरी सोमवार को निर्दलीय नामांकन भर दिया है. उन्होंने नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद मीडिया के सामने कहा कि मुझे उम्मीद है कि जनता मुझे वोट देगी. उन्होंने कहा कि मेरे दादा के बाद मैं भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी और मैंने 15 सालों से इस पार्टी की विचारधारा से जुड़कर रात-दिन मेहनत पूरी निष्ठा से की. उन्होंने कहा कि पार्टी ने साल 2018 में भी मुझे टिकट नहीं
राजस्थान में 6 नवंबर को नामांकन भरने की तारीख खत्म होने के साथ ही कई सीटों पर लड़ाई दिलचस्प हो गई है. दरअसल 200 सीटों में से एक सीटें ऐसी हैं जहां निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में बागी नेताओं ने नामांकन दाखिल करके कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के सियासी समीकरण को उलझा दिया है.
ज्यादातर ये वो लोग हैं जो पूर्व विधायक, पूर्व-मंत्री या वर्तमान विधायक हैं और विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने के कारण बागी हुए और ताल ठोक कर निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भर दिया है.
यहां तक की झोटवाड़ा, खंडेला जैसी कुछ सीटें तो ऐसी है जहां इन निर्दलीय नेताओं की सभाओं में इतनी भीड़ उमड़ रही है जितनी कांग्रेस और बीजेपी की सभाओं ने नहीं उमड़ी. इस भीड़ को देखते हुए दोनों ही प्रमुख पार्टियों ने रूठों को मनाने का काम शुरू कर दिया है.
9 नवंबर को नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख है. ऐसे में पार्टी दो दिन रूठों को मनाएगी, लेकिन अगर ये नेता नहीं मानते हैं तो उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा. फिलहाल लगभग 33 सीटों पर बागी नेताओं ने बीजेपी और कांग्रेस की नींद उड़ा रखी है.
ऐसे में इस रिपोर्ट में उन 15 ताकतवर नेताओं और उनकी सीटों के बारे में जानते हैं जिन्होंने बीजेपी और कांग्रेस छोड़ निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरने का फैसला किया है और ये नेता कैसे दोनों बड़ी पार्टियों के लिए कैसे हो सकते हैं.
कौन हैं वो 15 नेता
1. झोटवाड़ा- राजपाल सिंह शेखावत (बीजेपी से बागी)
भारतीय जनता पार्टी ने राजस्थान में 41 प्रत्याशियों की लिस्ट जारी की है जिसमें से सबसे बड़ी विधानसभा सीट झोटवाड़ा से जयपुर ग्रामीण के सांसद कर्नल राज्यवर्धन सिंह को प्रत्याशी बनाया है. इसी सीट से राजपाल सिंह शेखावत ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे हैं. शेखावत बीजेपी के बागी नेताओं की लिस्ट में शामिल है. वह झोटवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से ही पूर्व में दो बार विधायक भी रह चुके हैं और सरकार में मंत्री भी रहे है. इस विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने उनका टिकट काट दिया जिससे नाराज शेखावत ने ये कदम उठाया है.
झोटवाड़ा विधानसभा सीट जयपुर ग्रामीण में आती है. यहां 4 लाख 20 हजार वोटर्स हैं. इस सीट को पिछले विधानसभा चुनावों से भाजपा का गढ़ माना जाता है. साल 2013 व 2018 राजपाल सिंह शेखावत यहां लगातार 2 बार विधायक बने थे. हालांकि जनता में विधायक को लेकर नाराजगी के कारण साल 2018 में बीजेपी को यह सीट खोनी पड़ी थी.
अब जनता की इसी नाराजगी को खत्म करने के लिए इस बार बीजेपी ने कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को मैदान में उतारा है. ऐसे में राजपाल सिंह शेखावत का भी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरना बीजेपी के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है. शेखावत की एंट्री के कारण झोटवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में त्रिकोणीय समीकरण बन गया हैं.
2. डीडवाना- यूनुस खान (बीजेपी के बागी)
चुनाव से पहले राजस्थान में टिकट को लेकर पार्टियों में घमासान देखने को मिल रहा था. कई नेता टिकट कट जाने से नाराज नजर आ रहे थे इसी क्रम में वसुंधरा राजे के विश्वासपात्र यूनुस खान ने भी कुछ दिन पहले ही पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया है. यूनुस खान ने डीडवाना विधानसभा सीट से टिकट नहीं मिलने पर ये फैसला लिया था. खान ने उसी वक्त कहा था कि वह डीडवाना से निर्दलीय चुनाव लड़ेंगे.
राजस्थान की राजनीति में यूनुस खान को वसुंधरा राजे का सबसे करीबी माना जाता है. इसके अलावा यूनुस खान राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी का बड़ा अल्पसंख्यक चेहरा भी रहे हैं. वह डीडवाना सीट के दो बार विधायक भी रहे चुके हैं. पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने खान को कांग्रेस के दिग्गज नेता सचिन पायलट के खिलाफ टोंक से चुनाव मैदान में उतारा था. लेकिन इन चुनाव में पायलट की जीत हुई थी.वे पूर्ववर्ती बीजेपी की राजे सरकार में परिवहन मंत्री रहे थे.
3. शिव- रविन्द्र भाटी (बीजेपी के बागी)
युवा नेता रविन्द्र भाटी ने कुछ दिन पहले एक बीजेपी का दामन थामा था, हालांकि पार्टी की तरफ से टिकट नहीं दिए जाने पर उन्होंने नौ दिन में ही बगावत कर दी और फिर बाड़मेर जिले की शिव विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनावी मैदान में उतर गए.
अब इस युवा नेता के साथ चल रही हजारों तादाद में युवाओं की भीड़ ने कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही पार्टियों की चिंता बढ़ा दी है. युवा नेता रविन्द्र भाटी वहीं हैं जो साल 2019 में जयनारायण व्यास यूनिवर्सिटी से एबीवीपी (ABVP) से छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन वहां उन्हें टिकट नहीं मिला. जिसके बाद उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला लिया और रिकॉर्ड जीत हासिल की थी. आंदोलन और आक्रामक रवैया रखने वाले भाटी अब यूथ के बीच खासा पॉपुलर नाम हैं.
4. खंडेला- बंशीधर बाजिया (बीजेपी के बागी)
सीकर की खंडेला विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी से 2 बार विधायक रह चुके और पूर्व चिकित्सा राज्य मंत्री रहे बागी नेता बंशीधर बाजिया ने इस विधानसभा चुनाव में खंडेला सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया है. इसी सीट पर बीजेपी ने सुभाष मील को अपना उम्मीदवार घोषित किया है. सुभाष ने कांग्रेस पार्टी से टिकट नहीं दिए जाने पर बीजेपी ज्वाइन की और उन्हें ज्वाइन करने के 24 घंटे के भीतर ही बीजेपी ने उन्हें खंडेला सीट का प्रत्याशी घोषित कर दिया था.
5. बाड़मेर- प्रियंका चौधरी (बीजेपी के बागी)
भारतीय जनता पार्टी से बाड़मेर सीट पर टिकट मिलने की उम्मीद लगाए बैठी डॉ. प्रियंका चौधरी सोमवार को निर्दलीय नामांकन भर दिया है. उन्होंने नामांकन पत्र दाखिल करने के बाद मीडिया के सामने कहा कि मुझे उम्मीद है कि जनता मुझे वोट देगी. उन्होंने कहा कि मेरे दादा के बाद मैं भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी और मैंने 15 सालों से इस पार्टी की विचारधारा से जुड़कर रात-दिन मेहनत पूरी निष्ठा से की. उन्होंने कहा कि पार्टी ने साल 2018 में भी मुझे टिकट नहीं दिया था तब भी मैंने निष्ठा से पार्टी संगठन का काम किया. इस सीट पर बीजेपी की तरफ से दीपक कड़वासरा को प्रत्याशी उतारा गया है.
6. बसेड़ी- खिलाडी लाल बैरवा (कांग्रेस के बागी)
इस विधानसभा चुनाव में बसेड़ी से कांग्रेस ने अपने सिटिंग विधायक खिलाडी लाल बैरवा को टिकट नहीं दिया है. पार्टी ने उनकी जगह इस सीट से संजय जाटव को उम्मीदवार बनाया है. जिसके बाद लाल बैरवा ने राज्य अनुसूचित जाति आयोग के पद से इस्तीफा दे दिया और उसी सीट पर नामांकन भर दिया है. पिछले चुनाव यानी साल 2018 की बात करें तो बैरवा बीजेपी छितरिया जाटव को 17 हजार 556 मतों से पराजित किया था. इस चुनाव में बीजेपी ने इस सीट से सुखराम कोली को उम्मीदवार बनाया है.
बीजेपी-कांग्रेस के इन बागी नेताओं को भी जान लीजिए
इसके अलावा झोटवाड़ा सीट से ही आशु सिंह सुरपुरा ने भी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भरा है. वह भाजपा में नेता थे लेकिन टिकट कट जाने के कारण नाराज थे. इसके अलावा मालपुरा विधानसभा सीट से गोपाल गुर्जर भी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भरा है. वह कांग्रेस के बागी नेता है. इसके अलावा बांसवाड़ा सीट से हकरु मईडा मैदान में उतरे हैं और वह कांग्रेस के बागी नेता है.
नागौर विधानसभा सीट से हबीब उर रहमान इस चुनाव में कांग्रेस को कड़ी चुनौती देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. वहीं चित्तौड़गढ़ सीट से बीजेपी के बागी नेता चन्द्रभान सिंह आक्या, राजगढ विधानसभा सीट से कांग्रेस के बागी विधायक जोहरीलाल मीणा, कोटपूतली से बीजेपी के बागी नेता मुकेश गोयल, सुमेरपुर से वसुंधरा समर्थक मदन राठौड़, छबड़ा से कांग्रेस के बागी नरेश मीणा, स. माधोपुर से कांग्रेस के बागी नेता अजीजुद्दीन आजाद और सादुलशहर से कांग्रेसी के बागी ओम बिश्नोई का निर्दलीय नामांकन हुआ है.
पिछले विधानसभा चुनाव में बागियों ने पलट दिया था खेल
साल 2018 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो इस चुनाव में 13 निर्दलीय उम्मीदवार जीत कर आये थे और उन्हें कुल वोट का 9.47 प्रतिशत वोट मिले थे. उस चुनाव में सरकार बनाने से लेकर बचाने तक में निर्दलीय विधायकों की काफी अहम भूमिका रही है. इस चुनाव में भी कई ऐसी सीटें हैं, जहां निर्दलीय विधायक अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं.